Saturday, September 19, 2026

भारत की पहली Hydrogen Train: 110 Kmph की रफ्तार और बिना धुएं वाली रेल का नया दौर


   भारत में रेलवे अब सिर्फ तेज ट्रेनों और आधुनिक स्टेशनों तक सीमित नहीं है। भारतीय रेलवे ने स्वच्छ और पर्यावरण के अनुकूल परिवहन की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए देश की पहली Hydrogen Fuel Cell Train शुरू की है। यह ट्रेन हाइड्रोजन की मदद से खुद बिजली बनाकर चलती है और इसके इस्तेमाल से धुएं के बजाय जलवाष्प मुख्य उप-उत्पाद के रूप में निकलता है। जुलाई 2026 में इस ट्रेन को हरियाणा के जींद से सोनीपत के बीच रवाना किया गया था।


Hydrogen Train कहां चलेगी?

भारत की पहली Hydrogen Train फिलहाल Northern Railway के 89 किलोमीटर लंबे जींद–सोनीपत रेलखंड पर शुरू की गई है। यह जींद जंक्शन, गोहाना जंक्शन और सोनीपत को जोड़ती है तथा रास्ते के कई स्टेशनों और हॉल्ट पर सेवा देती है। इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य केवल ट्रेन चलाना नहीं, बल्कि भारत में Hydrogen Rail Technology के संचालन, रखरखाव और ईंधन व्यवस्था का अनुभव हासिल करना भी है।


110 Kmph की रफ्तार का क्या है मामला?


Hydrogen Train की डिजाइन स्पीड 110 किलोमीटर प्रति घंटा रखी गई है। शुरुआत में इसे अधिकतम 75 किलोमीटर प्रति घंटा की परिचालन गति के लिए मंजूरी दी गई थी। हालांकि सितंबर 2026 में रेलवे अधिकारियों ने बताया कि ट्रेन के 120 किलोमीटर प्रति घंटा तक के परीक्षण पूरे किए जा चुके हैं और अब अधिकतम 110 किलोमीटर प्रति घंटा की गति से संचालन की दिशा में काम किया जा रहा है। इसका मतलब यह है कि 110 Kmph अभी भविष्य की परिचालन क्षमता है, न कि मौजूदा नियमित गति।


Hydrogen Train काम कैसे करती है?


सामान्य इलेक्ट्रिक ट्रेन ओवरहेड बिजली की लाइनों से बिजली लेती है, जबकि Hydrogen Fuel Cell Train ट्रेन के अंदर ही बिजली पैदा करती है। इसमें Hydrogen और Oxygen के बीच रासायनिक प्रक्रिया के जरिए बिजली बनाई जाती है। इस प्रक्रिया में दहन नहीं होता और जलवाष्प मुख्य उप-उत्पाद होता है।


इस ट्रेन में दो Hydrogen Driving Power Cars और आठ Trailer Coaches हैं। ट्रेन में लगभग 2,600 यात्रियों को ले जाने की क्षमता बताई गई है। इसकी Hydrogen Fuel Cell Propulsion System की क्षमता 1,200 kW है।


1,200 किलोमीटर से ज्यादा चली ट्रेन


भारतीय रेलवे के अनुसार, जुलाई 2026 में शुरुआत के बाद Hydrogen Train ने 1,200 किलोमीटर से अधिक की सफल यात्रा पूरी की और इससे 3,200 लीटर से ज्यादा डीजल की बचत हुई। जींद में Hydrogen को स्टोर करने, कंप्रेस करने और ट्रेन में भरने के लिए समर्पित सुविधा भी विकसित की गई है।


भारत के रेलवे का भविष्य बदल सकता है Hydrogen


Hydrogen Train अभी एक महत्वपूर्ण पायलट प्रोजेक्ट है। इससे भारतीय रेलवे को यह समझने में मदद मिलेगी कि Hydrogen आधारित ट्रेनें लंबे समय में किन मार्गों पर उपयोगी हो सकती हैं। अगर तकनीक, ईंधन उपलब्धता, सुरक्षा और लागत से जुड़े पहलुओं में अच्छे परिणाम मिलते हैं, तो भविष्य में भारत के दूसरे गैर-विद्युतीकृत रेल मार्गों पर भी ऐसी तकनीक के इस्तेमाल की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।

भारत की Hydrogen Train इसलिए खास है क्योंकि यह केवल एक नई ट्रेन नहीं, बल्कि देश में स्वच्छ और भविष्य की रेल तकनीक के लिए एक नए अध्याय की शुरुआत है।


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